Pages

बिन तेरे क्या जिये...

बिन तेरे क्यां जिये
तुं जो है ही नहीं...

क्या कहे तु बतां
बिन तेरे क्यां करें...

तुं ही हर जगह,
तुं ही हर कदम,

बिन तेरे क्या जिये...

चांद की चांदनी,,
यूं जगाये मुझे..

वक्त ए थम गया,
यूं रुलाए ये मुझे.

बिन तेरे क्यां जिये...

दिल की आरजू
अब किसे हम कहें..

देखा था ख्वाब जो,
अब हम कैसे बूने.

बिन तेरे क्यां जिये...

मौत  सी जिंदगी,
अब लगे ये मुझे.

प्यार भी यूं हसे,
अब सताये मुझे..

बिन तेरे क्यां जिये...

वह हंसी पल जो थे
अब यादो में जीये,

चुरा लुं तुझे,
जो खुदा मिलें,

बिन तेरे क्यां जिये...