फलसफा जिंदगी का साफ है
यहां तो बदनाम ही आदमी है ||
तन्हाई ही मिली मुझे सस्ते में,
यहां तो परेशां ही आदमी है ||
नफरतें ही दिखी मुझे दिलों में,
यहां तो बिखरा ही आदमी है ||
ढूंढता ही रहा खुदा अपनों में,
यहां तो रुठा ही आदमी है ||
आदमी ही मिले मुझे जन्नत में,
यहां तो शैतान ही आदमी है ||